गान्ड बची तो लाखों पाये


(Gand Bachi To Lakhon Paye : Porn Story)

मेरी छोटी बहन वर्षा की चुदाई करवाने के बाद मुझे उस पे बहुत तरस आया, मैंने सोचा अब से मैं उसको कभी नहीं तड़पाउंगी, मुझे उस बेचारी पर बहुत तरस आता और वो भी अब मुझसे प्यार करती थी. अब मुझे वर्षा से कोई खुन्नस नहीं थी,
मैंने अपनी सगी छोटी बहन को बेरहमी से चुदवाया और अपनी इस घिनौनी आदत से मुझे बहुत आत्म ग्लानि होती थी. खुद से घृणा हुई, वो बेचारी मर जाती तो!

मेरी किस्मत में किसी को सुधारना तो नहीं लिखा, अब मैं उसे मेरी तरह बिगाड़ूँगी नहीं, नहीं तो सचमुच वो भी मेरी तरह लंड की अधीन हो जायेगी और लंड के लिये तड़पेगी, और कभी ना कभी बेचारी बदनाम हो जायेगी, इसलिये मैं अब मैं उसे किसी भी तरह ने नहीं उकसाती.
मुझे खुद को भी पता है कि वर्षा को अच्छे बुरे की समझ नहीं है, वो पढ़ाई में टॉपर है पर इस काम में कच्ची है, वो एकदम शरीफ किस्म की है और मैं एकदम कमीनी किस्म की हूँ, मैं हद से भी ज्यादा चुदक्कड़ हूँ, पर क्या करू मेरी मजबूरी है, अब मैं सुधर नहीं सकती, कितनी बार सुधरने की कोशिश की पर परिणाम कुछ नहीं आया.
वो मनहूस मेरी सहेली अलका जिसने मुझे बिगाड़ा था… उसकी चूत में कीड़े पड़ें साली के… मुझे ऐसी घिनौनी लत लगा गई थी कि मैं चाह कर भी सुधर नहीं सकती थी.

आठ दिन हो गये थे वर्षा की चुदाई को, वो बिल्कुल ठीक हो गई थी.

एक रात वर्षा मुझे बोली- दीदी, अब कब उस मजदूर से चुदवायेंगे? आठ दिन कब के हो गये हैं?

मैं बोली- वर्षा, क्या तेरी चूत पहले की तरह अंदर से जल रही है?

वो बोली- दीदी वैसे तो नहीं जल रही, पर जलने से पहले चुदवा लें तो ठीक रहेगा ना?

मैं बोली- नहीं वर्षा, ऐसे बार बार नहीं चुदाते, और मेरा और किशोर का भी अब झगड़ा हो गया है.

वो बोली- क्यों दीदी? आपने झगड़ा कर दिया? वो कितना अच्छा और काम का लड़का था.
वो मुँह बना कर बोली.

मैं सोचने लगी ‘अब कैसे समझाऊ वर्षा को?’
मैं सोच कर बोली- वर्षा, वो कमीना है, खुद को कुछ समझता है, उसे लगता है कि हम दोनों उसके बिना रह नहीं सकती, अब वर्षा सो जाओ और उसे भूल जाओ और उसकी बात फिर से मत करना!
वो चुपचाप सो गई.

मेरी जम कर चुदाई आखरी बार किशोर ने की थी और वर्षा की भी तब हुई थी, उसको पन्द्रह दिन हो चुके थे, अब मेरी चूत फिर से लंड के लिये तड़प रही थी, मैं रोज टॉयलेट में मेरी चूत में मोमबत्ती डालती पर वो ठंडक नहीं मिलती जो लंड से मिलती है. पन्द्रह दिन मुझे पन्द्रह महीने लग रहे थे, मैं टीवी पर सिर्फ किसिंग वाला सीन देखूँ तो भी मुझे सेक्स चढ़ जाता है, मेरी सांसें तेज हो जाती है और मेरी चूत गीली हो जाती है. मुझे अंदर से जलन होती है और मैं तड़पती हूँ, मुझसे यह तड़प बर्दाश्त नहीं होती.

मुझे किशोर को मिलने का मौका नहीं मिलता था,
अब तो मेरी छोटी बहन वर्षा को भी मैं बता चुकी थी, किशोर का और मेरा अब कोई चक्कर नहीं, मैं बेचारी वर्षा को इस चुदाई के खेल में घसीटना नहीं चाहती थी, इसलिये अब वर्षा से भी छुपा के करना था, इसलिये मुझे मौका नहीं मिल रहा था.

एक सुबह अचानक मुझे टाइम मिला, वर्षा स्कूल जा चुकी थी, पापा मम्मी दोनों बाइक से मेरे मामा के घर पैसे लेने के लिये चले गये हमारा नए मकान बनवाने का खर्च हिसाब से ज्यादा हो गया था.

मैं बहुत खुश हो गई, मैं नहा कर मेरी नई ड्रैस पहन कर, चाय लेकर गई मेरे यार किशोर के पास अपनी चूत ठंडी कराने!
तीन मजदूर के साथ किशोर काम कर रहा था, मैंने किशोर को चाय दी, वो धीमे से बोला- पिछले दरवाजे आना दस मिनट में!

मुझे तो चुदना ही था, मैं चाय देकर पिछले दरवाजे पे उसकी राह देखने लगी, आगे के हॉल में काम चालू था. मुझे थोड़ा डर लग रहा था.
तभी किशोर आया, मुझे पकड़ लिया, मुझे उठा के पीछे के दरवाजे से किचन में ले आया. हॉल में मजदूर अपनी धुन में काम कर रहे थे. मुझे बहुत डर लग रहा था कि कहीं कोई देख ना ले!

किचन में किशोर मुझे चूमने लगा, मैं गर्म होने लगी, मेरी सांसें तेज होने लगी, वो मेरे जोर से बोबे दबाने लगा, मसलने लगा, मेरी आहें निकलने लगी- आह्ह्ह आह्ह!
उसने मेरी लेगिंग में हाथ डाल दिया और मेरी चूत मसलने लगा.
“उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गयीईई… जल्दी डाल दो लंड… तड़पाओ मत!” उसका लंड 6 इंच का था, मैं पेन्ट के ऊपर से पकड़ कर बोली.

वो अपनी पेन्ट उतारने लगा, लंड निकाल के बोला- जान चूसोगी नहीं?
मैं झुक कर घुटनों पर बैठ गई और लंड लगी चूसने!
वो आह्ह्ह आह्ह्ह करने लगा और मेरा मुह लंड पे दबाने लगा, मैं भी गले के नीचे लंड उतार लेती, पूरा निगल लेती, वो आह्ह्ह आह्ह करते अकड़ने लगा, मेरा मुंह लंड पे दाब दिया. उसने मुंह में ही अचानक अपनी पिचकारी छोड़ दी, मैं अचानक से उसका वीर्य गटक गई, मुझे उसके स्वाद का पता ही ना चला.

उसका लंड ढीला पड़ गया, वो मुझे बोला- जान कितनी प्यास है तुझे?
और मेरी लेगिंग नीचे सरका कर मेरी गान्ड मसलने लगा. मेरी अह्ह्ह अह्ह निकलने लगी, वो मेरे चूतड़ों पर जीभ फिराने लगा, दांतों से चूतड़ काटने लगा.
“आह्ह्ह आह्ह्ह्ह…” मैं और गर्म होने लगी, उसने मेरी गान्ड में अपना मुंह लगा दिया और मेरी गान्ड की रिंग पे जीभ फेरने लगा.
“आह्ह्ह अह्ह मर गईई!” मैंने कहा- जल्दी अपना काम कर लो, कोई आ जायेगा.

उसने मुझे कहा- डियर लंड को फिर से खड़ा करो.
मैंने फिर से दम लगा कर चूसा तो लंड तन कर एकदम लोहा हो गया, मैं अपनी कमर झुका के चूत उंगलियों से फाड़ के बोली- जल्दी डाल दो ना!
उसने लंड सेट किया और धक्का मारा फच्च करता लंड मेरी चूत में घुस गया.
“आह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह ओह्म्म…” मुझे, मैं स्वर्ग में हूँ” ऐसा आनन्द आ रहा था.

तभी कुछ आवाज हुई, किशोर ने पीछे देखा, मैंने किशोर को धक्का देकर साइड में हटा के देखा तो किशोर का ही एक मजदूर था, गमला हाथ में था, वह हमको देख रहा था, उसका लंड हमें देख खड़ा हो गया था, उसकी पेन्ट में तम्बू साफ दिख रहा था, उसकी उम्र लगभग 45 साल आसपास होगी. उसका नाम था भीम जी काका था, एकदम शांत स्वभाव था, उनका उनकी हाईट लगभग करीब 6 फुट होगी जिसे मैं अंकल कहती थी.

वो हमें देख कर बाहर चला गया, मेरी तो गांड फट गई डर के मारे, मैं जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहने लगी, किशोर बोला- जान जाना मत प्लीज, मैं अभी आया! उसे जल्दी समझना पड़ेगा, किसी को बोले नहीं, नहीं तो मरवायेगा!
और वो बाहर चला गया, मैं बहुत डर गई थी, मैं मूर्ति बन कर गहरी सोच में पड़ गई, “किसी को बोलेगा तो? पापा को पता चल गया तो फिर से मुझे मार मिलेगी, और मार तो मैं सह जाऊँगी, पर मार से ज्यादा तो मुझे जो घर में शर्मिन्दगी होगी उसका बहुत डर था.”

तभी किशोर किचन में आया बोला- काका मान नहीं रहा था, बहुत समझाया पर समझ गया किसी को नहीं बोलेगा.
अब मुझे कुछ राहत हुई.
पर किशोर बोला- पर एक शर्त पर?
मैं आँखें फाड़ किशोर को देखने लगी, किशोर बोला- वो कहता है कि तुम उसे भी चोदने दोगी तो वो किसी को नहीं बोलेगा.

मैं तो देखती रह गई किशोर को… मैं गुस्से से बोली- क्या???
किशोर बोला- उस बिचारे की बीवी मर गई दो साल हुए… बिचारा तुम्हें दुआ देगा.
मुझे किशोर पर बहुत गुस्सा आने लगा, मैं बोली- यहाँ क्या खैरात बंट रही है? तुम उसे मना कर दो, मैं उसे कुछ भी करने नहीं दूंगी, वो मेरे बाप जितना है, बाप समान है!
वो बोला- एक बार की तो बात है, तुम्हें कुछ फर्क नहीं पड़ेगा.

मैं बोली- तुम समझ नहीं रहे, मुझे फर्क पड़ता है, तुम सब कुछ कर सकते हो, तुम को हक़ है मुझे चोदने का क्योंकि मैं तुमको प्यार करती हूं, तुम्हें शर्म नहीं आती यह कहते हुए… वो मेरे बाप जितना है.
किशोर बोला- मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूं, पर जान पर परिस्थिति को समझो! मैं तुमसे उतना ही प्यार करूँगा. मान जाओ ना जान! माया तुझे मेरी कसम है, मुझसे तुम दिल से प्यार करती होगी तो तुम मेरी कसम नहीं तोड़ोगी, फिर कभी नहीं कहूँगा प्लीज एक बार!
मैंने कहा- किशोर, मैं तुमसे इतना प्यार करती हूँ कि जान भी मांगो तो दे सकती हूं पर!!
किशोर बोला- पर बर को छोड़ो जान… मैं उसे भेज रहा हूँ, प्लीज जान, तुम उसे एक शब्द भी मत बोलना, करने देना जो भी करे! बूढ़ा तो है कितनी देर टिकेगा, जान तुम खामखा डर रही हो मैं उसे भेजता हूँ!

और वो बाहर चला गया.

मैं सोचने लगी- हे भगवान ये क्या… अब मुंह बोले अंकल से भी इस माया को चुदवाओगे?
तभी किचन में अंकल आया, मजदूरों में सबसे बड़े वो थे जिसे मैं चाय देने घर पर आती तो अंकल बोलती थी,
मुझे डर लग रहा था, मैं थोड़ी काम्प रही थी.

वो मेरे पास आकर मेरे बोबे देखने लगा, फिर मेरी गान्ड को घूरता.
मुझे इतनी शर्म कभी नहीं आई, वो मुझे भूखी नजरों से तोल रहा था.

मैंने शरमा कर माथा नीचे कर लिया.
वो बोले- बेटी, तेरा नाम तो मुझे नहीं पता नहीं पर तेरी गान्ड बड़ी मस्त है, भरावदार है, और तेरे पजामी में से कैसी बाहर आने को बेताब हो रही है. इस नजर से तो मैंने आज तुझे देखा, तूने मेरे बरसों से सोये लंड को जगा दिया.
और मुझे बाँहों में भर कर मुझे चूमने लगा, मेरे होंठ अपने मुंह में चूसने लगा, उसके मुख से बीड़ी की दुर्गन्ध आ रही थी, मैंने मुंह फेर लिया.

वो उसके पत्थर जैसे हाथों से मेरे चूतड़ दबाने लगा. मेरे चूतड़ दुख रहे थे, मैं मेरे हाथों से उसके हाथ हटा रही थी, उसने मुझे घुमा दिया और वो पीछे से मेरी गर्दन पे मेरी गले की नसों को ऐसे चूसता कि मेरा खून चूस लेगा. उसका लंड मेरी गांड को टच हो रहा था, कड़क था मुझे चुभ रहा था.

उसने अपने पत्थर जैसे हाथों से मेरे बोबे ऐसे दबाये कि लाल हो गये और सुजा डाले. मुझे सचमुच बहुत दर्द हो रहा था.
उसने अपनी पेन्ट उतारी, उसका लंड करीब नौ इंच लंबा होगा, मेरी हाथ की कलाई से मोटा था. इतना लंबा लंड देखकर ही मैं डर गई, मेरी धड़कन रुक सी गई, अचानक से उसने खींच कर मेरी लेगी पेन्टी सहित उतार कर मुझे झुका के उसका लंड मेरी चूत में बिना थूक लगाये घुसेड़ दिया.
आधा लंड मेरी चूत में घुस गया और मेरी चीख निकली- उईईईइ मा मम्मी उईईई माँ ह्हहा!
मैं रोते हुये बोली- अंकल, मुझे जाने दो, दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी.

आह्ह्ह उसने मेरा मुँह अपने हाथों से दाब दिया, वो बोला- बेटी, थोड़ी देर दर्द होगा, फिर मजा आयेगा.
फिर जोर से दूसरा धक्का मारा, मेरे पैर ऊंचे हो गये, पूरा लंड चला गया मेरी चूत में, मुझे ऐसा दर्दनाक अहसास हुआ कि कोई जबरन मेरी चूत में लकड़े का मोटा डंडा घुसेड़ रहा हो!
मेरी नाक में से सिर्फ ‘ऊऊऊऊ ऊऊऊ…’ निकल रहा था. उसको मैं धक्के मार कर दूर करती पर वो इतना ताकत वाला था कि उसने मुझे एकदम से जकड़ लिया और मुझे चोदता रहा.
मैं क्या कर सकती थी, मेरे प्यार ने मुझे उसकी कसम दी थी,
मैं दर्द सहती गई, मेरे आंसू बहते रहे पर दो बरसों से चूत का भूखा वो अंकल धक्के मारता, मेरे पैर ऊँचे हो जाते, लंड मेरे पेट में आंतों को छूता.

दर्द से मैं बेहाल हो गई, मेरे पैर काम्प रहे थे, वो मुझे झुका कर मुँह दाब के चोदता जा रहा था, मैं बार बार आगे खिसकने की कोशिश करती थी, तो अंकल ने मुझे उठा कर दीवार के पास खड़ी कर दिया, मुझे चिपका कर दीवार पर दाब दिया.
इतना लंबा और मोटा लंड मेरी चूत में आज तक नहीं गया था, मुझे कसम से सचमुच बहुत दर्द हो रहा था, मेरे आंसू निकल रहे थे, कुछ बोल भी नहीं पाती थी, मुझे मेरी जान से भी प्यारे आशिक की कसम थी, मैं दर्द सह रही थी.

उसने बिना रहम किये मुझे ऐसा चोदा कि मुझे अधमरी कर दिया, अंकल बीस मिनट तक लगादार चोदने के बाद मेरी चूत में झड़ा, उसका वीर्य भी बहुत निकला था, वो थक गया था, जोर से सांसें ले रहा था.
फिर उसने मेरी चूत को अपने वीर्य से पूरी भर कर अपना लंड निकाला. मेरे पैरों की ऐड़ी तक वीर्य के रेले आ गये, मेरी चूत में से वीर्य की बूँदें नीचे जमीन पर टपक रही थी.

फिर वो बोला- बेटी, अब मैं किसी को नहीं बोलूंगा, तू तो मेरी बेटी जैसी है, जा बेटी जा!

मेरी चूत सूज गई थी, मैं कपड़े पहन जल्दी जल्दी घर जाने लगी. मेरी चूत बहुत दर्द कर रही थी, मेरी चाल भी बदल गई थी, मैं काँपती हुई चुपचाप घर आ गई, मेरे घर पर कोई नहीं था, मैं सोच रही थी कि जिसको मैं अंकल बोलती थी, सब मजदूरों में इस अंकल को ही मैं भगवान का आदमी समझती थी, वो मुझे बार बार बोलता था “बेटी, पापा को बोलना, ये सामान नहीं है, वो नहीं है!” बाकी सब मजदूर लड़के तो मुझे भूखी नजर से घूरते थे, पर वो अंकल कमीना इतना स्वार्थी होगा, मुझे ये जानकर बहुत दुःख हुआ, उसने मेरी मजबूरी का कितना फायदा लिया.
और कमीने ने थूक भी नहीं लगाया, मेरी चूत अंदर तक छिल गई थी, मेरा इंसानियत पर से भरोसा ही उठ गया.

मेरी चूत में दर्द हो रहा था, मैं चूत पकड़ जल्दी जल्दी में बाथरूम में गई, चुत को गौर से देखा, ऊपर से सूज गई थी, मेरी चूत फट गई थी पहले से कई गुना बड़ी हो गई थी, छोटी कांच की थम्सअप बोतल डालती तो शायद पूरी आराम से घुस जाती!
और धोते वक़्त मेरी चूत अंदर से बाल निकल रहे थे, शायद कोरा लंड चूत में जाने की वजह से मेरी ही झांटें उखड़ कर अंदर चली गई होंगी.
मैंने अच्छे से अपनी चूत को धोया, उसका सब वीर्य उंगली से निकाल दिया, पानी के प्रेशर से चूत धोई.

मैं अच्छे से नहा कर बाथरूम से निकली, अपनी चूत पर हाथ फेर रही थी, चूत में बहुत दर्द हो रहा था, इस दर्द के लिये मैं कुछ ढूंढ रही थी, मुजे बोरोप्लस मिली, आधी ट्यूब बची थी, मैंने बोरोप्लस अपनी चूत के ऊपर लगाई, फिर कुछ सोच कर चूत के अंदर तक बोरोप्लस की ट्यूब डाली और दबाया पूरी चूत को बोरो प्लस से भर दिया अब जाके मुझे कुछ राहत हुई, दर्द कम हुआ.

मैंने फिर शांति से सोचा, “जो होना था वो हो गया, उस अंकल का भी दोष नहीं, दो साल से बीवी मर गई है बिचारा उसे भी तो चुदाई का मन होता होगा, और ऊपर से उसने मुझे नंगी चुदाई करवाते देख लिया था, उसको भी सेक्स चढ़ गया, किसी को भी चढ़ जाता, उसमें कोई बड़ी बात नहीं! पर हां, उस कमीने अंकल को
अच्छे से चोदना नहीं आता, शायद तभी तो उस अंकल की बीवी मर गई होगी, आव देखा ना ताव देखा, बस चूत देख के टूट पड़ा, उसे कोरा लंड चूत में घुसेड़ना नहीं चाहिये था, ऐसे भला कोई चोदता है, ये तो मैं थी चुदक्कड़ माया जो सह गई, और कोई लड़की होती तो ऐसे लंड के डर से जिंदगी भर कुंवारी रहती… लंड के नाम से भी उम्र भर नफरत करती. कुछ ऐसे किस्म लोग लंड को बदनाम कर देते हैं.

आज पहली बार मुझे चुदवाते डर लगा और मैं चुदाई का मजा भी ना ले सकी, लड़की को प्यार से चोदना चाहिये, लड़की खुद बोले ‘जल्दी डाल मेरे राजा…’ ना कि ऐसे अधमरी कर के!
वैसे तो अंकल के लंड से मेरी चूत एकदम शांत हो गई थी और दुख रही थी, मैंने सोचा कि यह तो अच्छा हुआ माया… उस अंकल को गान्ड मारने का शौक नहीं था, नहीं तो आज तुझे कोई बचाने भी नहीं आता, और हंड्रेड परसेंट टांके आते तेरी प्यारी सी गान्ड को!

इसे कहते हैं “गान्ड बची तो लाखों पाये!”

यह मेरी सच्ची कहानी है, मेल करके बताना कि कैसी लगी दोस्तो!
फिर मिलेंगे!
आपकी माया